Ganesh ji ki aarti pdf: गणेश जी की आरती लिखित pdf

विध्नहर्ता भगवान् गणेश देवों के देव महादेव एवं माता पार्वती के छोटे पुत्र हैं, विध्नहर्ता गणेश की पत्नियों के नाम रिद्धि एवं सिद्धि हैं। रिद्धि एवं सिद्धि भगवान् विश्वकर्मा जी की पुत्रियां हैं। हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले सर्वप्रथम भगवान् गणेश का नाम अवश्य लिया जाता है। वेदों के अनुसार, गणपति भगवान की पूजा करने से बल, बुद्धिएवं ज्ञान में वृद्धि होती है।

भगवान् गणेश की पूजा एवं आरती करने से किसी भी कार्य में आ रही बाधा दूर होती है। भगवान् गणेश जी की पूजा एवं आरती करने से किसी भी कार्य में आ रही बाधा स्वतः समाप्त हो जाती है। भगवान् गणेश की पूजा एवं आरती करने से जीवन के समस्त कष्ट नष्ट हो जाते हैं। इन्ही कारणों से उन्हें विध्नहर्ता भी कहा जाता है।

भगवान् गणेश की पूजा आरती के बिना अधूरी मानी जाती है। गणेश जी की आरती प्रातः काल एवं सायं काल दोनों समय करनी चाहिए भगवान् गणेश जी की आरती करने से दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है। एवं उस घर में सुख -समृद्धि की वृद्धि होती है।

भगवान् गणेश की आरती करते समय अनेक लोग गलतियां कर बैठते हैं। भगवान् गणेश जी की आरती करते समय आरती में बत्तियाँ की संख्या, आरती घूमने की दिशा आदि सम्बंधित बातों का विशेष ध्यान देना चाहिए।

Ganesh ji ki aarti pdf लिंक

निचे दिए लिंक पर क्लिक कर के आप गणेश जी की आरती pdf फाइल को प्राप्त कर सकते है। गणेश जी की आरती pdf फाइल सब के फ्री में दिया गया है।

Ganesh ji ki aarti pdf संक्षिप्त विवरण

File Name Ganesh ji ki aarti Pdf
File TypePDF
LanguageHindi
CategoryReligion
No. of Pages3 Pages
File Size575 KB
File StatusActive
Uploaded ByRajesh Kushwaha

Ganesh ji ki aarti in Hindi Pdf Lyrics

Ganesh ji ki aarti निचे डाल दिया गया है आप सभी भक्तों से उम्मीद करता हूँ की आप लोग रोज गणेश जी की आरती लिरिक्स से गणेश भगवान की पूजा करेगा।

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥

‘सूर’ श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥

दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥

कैसे करें गणेश आरती

गणेश आरती करते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान देना चाहिए।

  • आरती के लिए रुई से बनी देशी घी की बत्ती होनी चाहिए।
  • गणेश आरती में संभव हो तो तिल के तेल की बत्ती नहीं होनी चाहिए।
  • बत्तियों की संख्या 1, 5,7, 9, 11 या 21 होनी चाहिए।
  • गणेश आरती हमेशा लयबद्ध तरीके से करनी चाहिए।
  • गणेश आरती कपूर से भी की जाती है।
  • गणेश आरती आरम्भ करते समय 3 बार शंख बजाएं।
  • गणेश आरती करते समय लय के अनुसार ताली बजाएं।
  • गणेश आरती को लयबद्ध तरीके से गायें।
  • गणेश आरती गाते समय शुद्ध उच्चारण करें।

भगवान् गणेश की पूजा विधि

बुधवार के दिन को भगवान् गणेश का दिन माना जाता है। भगवान् गणेश की पूजा करने के लिए बुधवार के दिन प्रातः उठकर स्नान आदि करके वस्त्र पहन लें। संभव हो तो हरे रंग के वस्त्र पहनें। इस दिन हरे रंग का वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसके पश्चात उत्तर या पूरब की तरफ मुख करके पूजा आरम्भ करें। भगवान् गणेश को चंदन, धुप, रोली, दीप, फूल मोदक इत्यादि चढ़ाएं। इसके पश्चात गणेश जी को रोली का तिलक लगाएं। भगवान् गणेश को दूर्वा अवश्य चढ़ाएं। फिर गणेश जी के मन्त्रों का जाप करते हुए गणेश जी की आरती करें।

गणेश जी की मूर्ति की स्थापना की विधि

किसी भी शुभ कार्य अथवा मांगलिक कार्य को करने से पहले भगवान् गणेश जी की पूजा की जाती है। भगवान् गणेश का जन्मोत्सव देशभर भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थ तिथि को धूमधाम से मनाया जाता है। इन दिनों भगवान् गणेश जी की हर घर एवं मंदिरों में मूर्ति की स्थापना की जाती है। एवं गणपति जी की पुरे 10 दिनों तक पुरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान् गणेश की स्थापना इस प्रकार की जाती है।

  • सबसे पहले एक चौकी लें, एवं उस पर गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें।
  • इसके पश्चात चौकी पर लाल रंग का कपडा बिछाकर उस पर अक्षत रखें।
  • इसके पश्चात चौकी पर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
  • इसके पश्चात गणेश जी की मूर्ति पर गंगा जल छिड़कें।
  • फिर गणेश जी की मूर्ति के दोनों तरफ रिद्धि एवं सिद्धि के रूप में एक एक सुपारी रखें।
  • भगवान् गणेश जी की मूर्ति के दाहिनी तरफ जल से भरा कलश रखें।
  • हाथ में फूल एवं अक्षत लेकर भगवान् गणेश जी का स्मरण करें।
  • भगवान् गणेश जी के मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें।

भगवान् गणेश जी की पूजा से फायदा

हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ एवं मांगलिक कार्यों में सर्वप्रथम भगवान् गणेश का नाम लिया जाता है। हिन्दू धर्म में भगवान् गणेश सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक माने जाते हैं। गणेश जी को विधान विनायक एवं गणपति नाम से भी जाना जाता है। भगवान् गणेश भगवान् शंकर एवं पार्वती माता जी के छोटे पुत्र एवं भगवान् कार्तिकेय के छोटे भाई हैं।

शास्त्रों के अनुसार, भगवान् गणेश के 2 पुत्र हैं। जिनका नाम शुभ एवं लाभ है। शुभ देवी रिद्धि के पुत्र हैं, भगवान् गणेश जी की पूजा करने से एवं लाभ देवी सिद्धि के पुत्र हैं। भगवान् गणेश जी की पूजा करने से बुद्धि, ज्ञान एवं शुभता का विकास होता है।

प्रत्येक बुधवार को नियमित रूप से भगवान् गणेश जी के “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करने से मानसिक तनाव एवं हर प्रकार के संकट से मुक्ति मिलती है। एवं परम ज्ञान की प्राप्ति होती है। बुधवार के दिन “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जप करने एवं गणेश जी की आरती करने से बुद्धि का विकास होता है। समस्त परेशानियों का स्वतः निवारण हो जाता है। समस्त क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है।

गणेश चतुर्थी गणेश जी की पूजा-आरती का मुख्या पर्व है। जो प्रत्येक वर्ष माह अगस्त या सितम्बर में पड़ती है। इसके अतिरिक्त कुछ लोग प्रत्येक माह की चतुर्थी तिथि को भी भगवान् गणेश की पूजा करते हैं। क्योंकि भगवान् गणेश इस तिथि के स्वामी माने जाते हैं। इनकी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। समस्त बाधाएं दूर होती हैं।दांपत्य जीवन खुशियों से भरा होता है। इन प्रमुख तिथियों एवं त्योहारों के अतिरिक्त प्रत्येक बुधवार को गणेश जी की पूजा-आरती अवश्य की जानी चाहिए। ऐसा करने से भगवान गणेश अवश्य प्रसन्न होते हैं।

सुख समृद्धि की प्राप्ति

ऐसा माना जाता है कि, घर में सुख-शांति एवं समृद्धि लाने के लिए भगवान् गणेश जी की पूजा-अर्चना करना चाहिए। ,बुधवार के दिन भगवान् गणेश जी की पूजा करने से परिवार हमेशा खुशहाल रहता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। एवं हर प्रकार के कष्टों का नाश होता है।

भाग्योदय होता है

जो भी लोग भगवान् गणेश जी की पूजा आरती सच्चे ह्रदय से करते हैं, भगवान् गणपति उसको कभी निराश नहीं करते हैं। उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। भगवान् गणेश जी की आरती करने से भाग्योदय होता है। बीमारियां कोसों दूर रहती हैं

एवं सच्चे ह्रदय से पूजा-आरती करने पर धर्म का संचार होता है। ज्ञान की प्राप्ति होती है, बुद्धि का विकास होता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश जी की आरती से धन-लाभ की प्राप्ति होती है। एवं भगवान् गणेश की हमेशा कृपा बनी रहती है।

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