Shiv Chalisa PDF 2024: श्री शिव चालीसा पीडीएफ फ्री डाउनलोड

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भगवान् शिव आजन्म हैं, निरंकार हैं, वे देवों के देव महादेव हैं। समस्त देवताओं की अपेक्षा भगवान् शिव अपने भक्तों से अतिशीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। उनके इसी भोले स्वभाव के कारण उन्हें भोलेनाथ कहा जाता है। भगवान शिव का एक नाम नीलकंठ भी है।

क्योंकि देवताओं एवं राक्षसों द्वारा मिलकर किये गए समुद्र मंथन से निकले अत्यंत विनाशकारी एवं अत्यंत विषैले विष जिसका नाम “हलाहल” विष था, जिसके समुद्र मंथन में निकलने के पश्चात तीनों लोकों में त्राहि -त्राहि मच गयी थी, जिसके पश्चात इस सृष्टि को इस विष से रक्षा के लिए भगवन भोलेनाथ ने हलाहल विष को पी लिया।

उन्हों ने अपने कंठ में धारण कर लिया, हलाहल विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया। तब से उनका नाम नीलकंठ पड़ गया। भगवान् भोलेनाथ को उनकी सौम्य आकृति के उनके रौद्र रूप के लिए भी जाना जाता है। मनुष्य के जीवन में शिव चालीसा का काफी महत्व है। शिव चलीसा के पाठ से आप अपने कष्टों को दूर करके शिव की अपार कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

वेदों के अनुसार, शिव चालीसा का पाठ करके भक्त अपने जीवन की समस्त परेशानियों एवं संकट को दूर कर सकता है। भगवान् भोलेनाथ को शिव चालीसा के आसान शब्दों से सरलता से प्रसन्न किया जा सकता है। शिव चालीसा के पाठ से हर असंभव कार्य को भी संभव बनाया जा सकता है।

शिव चालीसा की 40 पंक्तियाँ आसान शब्दों में विद्यमान हैं। जिसकी महिमा बहुत अधिक है। भगवान् भोलेनाथ अपने भक्तों द्वारा शिव चालीसा का पाठ करने से अतिशीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। एवं उन्हें मन चाहा वरदान दे देते हैं। शिव चालीसा का हिन्दू धर्म के पूजा-पाठ में काफी महत्व है।

माना जाता है कि, भगवान् शिव की सच्चे ह्रदय से भक्ति करने वालों पर उनकी विशेष कृपा रहती है। भगवान् शिव की पूजा अर्चना के लिए सोमवार का दिन विशेष फलदायी होता है। इस दिन अनेकों भक्त मंदिर में उनके दर्शन के लिए आते हैं।

वैसे तो भगवान् शंकर को सच्चे मन से याद करने पर भी वो भक्तों की पुकार सुन लेते हैं और उनके कष्टों का भी निवारण करते हैं। परन्तु जो व्यक्ति सच्चे मन से नियमि रूप से शिव चालीसा का पाठ करता है, उस पर भगवान् शिव की विशेष कृपा बनी रहती है।

Shiv Chalisa PDF लिंक

हे भक्तो मैंने आप के Shiv Chalisa PDF फाइल का लिंक निचे दे दिया है। आप लिंक पर क्लिक कर के Shiv Chalisa PDF फाइल को डाउनलोड कर सकते है। Shiv Chalisa PDF फाइल हिंदी और इंग्लिश भाषा में दिया हुवा है। आप अपनी सुविधा अनुसार भाषा का चुनाव कर के Shiv Chalisa PDF को डाउनलोड कर सकते है।

Shiv Chalisa PDF संक्षिप्त विवरण

File Name Shiv Chalisa PDF
File TypePDF
CategoryReligion
No. of Pages5 Pages
File Size304 KB, 294 KB
File StatusActive
Uploaded ByRajesh Kushwaha
shiv chalisa path pdf

Shiv Chalisa PDF

श्री शिव चालीसा लिरिक्स हिंदी और इंग्लिश में दी हुई है।

Shiv Chalisa PDF Hindi

 
।।दोहा।।
 
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

श्री शिव चालीसा पाठ
 
जय गिरिजा पति दीन दयाला।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके।
कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाये।
मुण्डमाल तन छार लगाये॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।
छवि को देख नाग मुनि मोहे॥

मैना मातु की ह्वै दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

किया उपद्रव तारक भारी।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥

आप जलंधर असुर संहारा।
सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

किया तपहिं भागीरथ भारी।
पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥

दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं।
सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला।
जरे सुरासुर भये विहाला॥

कीन्ह दया तहँ करी सहाई।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

सहस कमल में हो रहे धारी।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई।
कमल नयन पूजन चहं सोई॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनंत अविनाशी।
करत कृपा सब के घटवासी॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।
भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
यहि अवसर मोहि आन उबारो॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट से मोहि आन उबारो॥

मातु पिता भ्राता सब कोई।
संकट में पूछत नहिं कोई॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु अब संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदाहीं।
जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥

अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन।
मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
नारद शारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमो शिवाय।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर होत है शम्भु सहाई॥

ॠनिया जो कोई हो अधिकारी।
पाठ करे सो पावन हारी॥

पुत्र हीन कर इच्छा कोई।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा।
तन नहीं ताके रहे कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

जन्म जन्म के पाप नसावे।
अन्तवास शिवपुर में पावे॥

कहे अयोध्या आस तुम्हारी।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

 
॥दोहा॥

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥

Shiv Chalisa PDF English

॥ Doha ॥

Jai Ganesh Girija Suvan Mangal Mul Sujan।
Kahat Ayodhya Das Tum Dev Abhaya Varadan ॥

॥ Shiv Chalisa ॥

Jai Girijapati din dayala,
sada karat santan pritpala.

Bhol chahdrama sohat nike,
kanan kundal nag phani ke.

Ang gaur, shir gangabanae,
mundamal tan chhar lagae.

Vastra khal bagambar sohe,
chhavi ko dekh nag muni mohe.

Maina matu ki havai dulari,
bam ang sohat chhavi niyari

Kar men trishul sohat chhavi bhari,
karai sada shatrun shahkar.

Nandi Ganesh sohain tahan kaise,
sagar madhya kamal hai jaise.

Kartik shyam aur ganarau,
ya chhavi ko kahi jat na kau.

Devani jab hi ai pukara,
tabahin dukh Prabhu ap nivara.

Kiya upadrav Tarak bhari,
devani sab mili turnahin juhari.

Turant shadanan ap pathayo,
lay nimesh mahin mari girayo.

Ap jaladhar asur sanhara,
suyash tumhara vidit sansara.

Tripurasur sang yudh machai,
sabahin kripa kari linh bachai.

Kiya tapahin Bhagirath bhari,
purve pratigya tasu purari.

Davan manan tum sam kou nahin,
sevak ustuti karat sadai.

Ved nam mahima tab gai,
akath anadi bhed nahin pai.

Pragateu dadi-manthan te jvala,
jare surasur bahe bihala.

Dindayal tahan kari sahai,
Nilkanth tab nam kahai.

Pujan Ramchandra jab kinha,
jit ke Lanka Vibhishan dinha.

Sahas kamal men ho rahe dhari,
kinha pariksha tabahi purari.

Ek kamal prabhu rakhyau gohi,
kamal nayan pujan chahan soi.

Kathin bhakti dekhi Prabhu Shankar,
bhaye prasan diye ichhatvar.

Jai Jai Jai Anant avinasi,
karat kripa sab ke ghat vasi.

Dushat sakal nit mohi satavaen,
bhramat rahe mohi chain na avaen.

Trahi trahi main nath pukarun,
yahi avasari mohi, ani ubaro.

Lai trishul shatruni ko maro,
sankat se mohe ani ubaro.

Mata pita bhrata sab hoi,
sankat men puchhat nahin koi.

Svarmi ek hai as tumhari,
ai haranu ab sankat bhari.

Dhan nirdhan ko det sadai,
jo koi jancha so phal pahin.

Ustuti kehi vidhi karaun tumhari,
shamahu nath ab chuk hamari.

Shahkar ho sankat ke nashan,
vighna vinashan mangal karan.

Yogi yati muni dhyan lagavain,
sharad Narad shish nivavain.

Namo, namo jai namo Shivaye,
sur Brahmadik par na paye.

Jo yah path kare man lai,
tapar hot hain Shambhu sahai.

Rinya jo koi ho adhikari,
path kare so pavan-hari

Putra ho na ichchha kari koi,
nishchai Shiv prasad te hoi.

Pandit triyodashi ko lavain,
dhyan purvak horn karavain.

Tryodashi vrita kare hamesh,
tan nahin take rahe kalesh.

Dhup dip naived chadhavai,
Shankar sanmukh path sunavai.

Janam Janam ke pap nashavai,
ahtvas Shivpur men pavai.

Kahe Ayodhya as tumhari,
jan sakal dukh harahu hamari

॥ doha ॥

nitya nema kari pratahi। patha karau chalis ॥
tum meri man kamana। purna karahu jagadish ॥

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शिव चालीसा का पाठ करने का तरीका

शिव चालीसा का पाठ करने के अनेकों नियम शास्त्रों में भी बताये गए हैं। विशेष रूप से सोमवार के दिन शिव चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। निचे शिवा चालीसा करने की विधि बताई गयी है।

  • प्रातः काल उठकर स्नान करें, और स्वच्छ कपडे धारण करें।
  • चेहरा पूर्व दिशा की तरफ रखें, एवं कुशा के आशन पर बैठें।
  • पूजन सामग्री में धुप-दीप, फूलों की माला, सफ़ेद चन्दन, अगर संभव हो तो आक का फूल, कलावा, चावल, एवं प्रसाद के लिए मिठाई या शुद्ध मिश्री को रखें।
  • 1 लोटे में शुद्ध जल भरकर रखें।
  • पाठ आरम्भ करने से पहले गाय के घी का दीपक जलाएं।
  • शिव चालीसा का पाठ पूर्ण भक्ति भाव से करें।
  • भगवान् शिव चालीसा का पाठ 3 या 5 बार करें।
  • शिव चालीसा का पाठ होने पर सुनने वालों को भी इसका लाभ मिलता है।
  • पाठ पूरा होने के पश्चात लोटे के जल को पुरे घर में छिड़क दें।
  • थोड़ा सा जल स्वयं पी लें, एवं मिठाई अथवा मिश्री को प्रसाद के रूप में स्वयं खाएं एवं अन्य लोगों को भी खिलाएं।

कितने बार पढ़ें शिव चालीसा

शिव चालीसा का पाठ भगवान् शंकर को प्रसन्न करने का बहुत सरल उपाय है। शिव चालीसा को शिव पुराण से लिया गया है। एवं शिव पुराण के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी हैं। यह पवित्र ग्रन्थ देववाणी संस्कृत में लिखी गयी है। जिसमे 24 हजार श्लोक हैं।

ऐसी मान्यता है कि, शिव चालीसा के पाठ से भक्तों को अति शीघ्र फायदा होता है। उनके समस्त कष्ट दूर होते हैं, एवं उनकी समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शिव चालीसा का पाठ विधि-विधान से करना चाहिए। तभी भक्तों को उसका उचित फल मिलेगा।

शिव चालीसा में 40 पंक्तियाँ हैं। जो अपने आप में अदभुत हैं। इसमें भगवान् भोलेनाथ का स्तुतिगान है। शिव चालीसा अत्यंत सरल होने के साथ ही अत्यंत फलदायी भी है। शिव चालीसा को 40 बार पढ़ने से वो सिद्ध हो जाती हैं। एवं किसी मनोकामना की पूर्ति या संकट के समय चालीसा की पंक्ति याद कर 40 बार पढ़ने से समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। एवं संकट का निवारण होता है।

शिव चालीसा के क्या लाभ हैं

वेदों के अनुसार, संसार में ऐसा कोई कार्य नहीं है, जो शिव चालीसा की सहायता से न हो सके। शिव चालीसा के पाठ से असंभव कार्य एवं कठिन से कठिन प्रतीत होने वाले कार्यों को भी सरलता से पूर्ण किया जा सकता है। भगवान शिव का एक नाम भोले भंडारी भी है, यानि भगवान शिव अत्यंत भोले स्वभाव के भी हैं।

शिव चालीसा के नियमित पाठ करने से भगवान् शिव शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं, एवं समस्त मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। जो व्यक्ति प्रातः काल उठकर स्नानकर नियमित शिव चालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन में समस्त कष्ट, बाधाएं एवं परेशानियां स्वयं समाप्त हो जाती हैं।

शिव चालीसा के पाठ से दुःख-परेशानियों का निवारण

इस संसार में ऐसा कोई भी नहीं जिसे कष्ट न हो, दुःख, परेशानी न हो, परन्तु अगर आप इन सब दुःख, परेशानियों से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो अविलम्ब नियमित शिव चालीसा का पाठ आरम्भ कर दें। जीवन की समस्त समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाएँगी।

शिव चालीसा के पाठ से दूर होंगी दांपत्य जीवन की समस्यायें

इस संसार में बहुत से ऐसे लोग हैं, जो अपने दांपत्य जीवन से खुश नहीं हैं। उनके आपसी संबंधों में अक्सर क्लेश या एक दूसरे को नीचा दिखाने की भावना जागृत होती है। जिसमे सुधार होना संभव नहीं लगता। तब अविलम्ब भगवान् शिव चालीसा का नियमित पाठ करना आरम्भ कर दें। निः संदेह आपके जीवन की समस्त परेशानियां एवं कष्ट स्वतः समाप्त हो जायेंगे। एवं एक दूसरे के प्रति अनंत प्रेम जागृत होगा।

शिव चालीसा के पाठ से भय होता है समाप्त

नियमित रूप से शिव चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के मन में साहस एवं शक्ति का संचार होता है। जिसके फलस्वरूप वो हर प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है। भगवान् शंकर का नियमित पाठ करने से भगवान् शंकर की शक्ति अदृश्य रूप से हमेशा सहायता करती है। भूत-प्रेत या अन्य किसी भी प्रकार का भय भगवान् शिव की भक्ति में लीन रहने पर निकट नहीं आ सकता है।

मनचाहा जीवन साथी की प्राप्ति

सच्ची निष्ठा एवं विधिपूर्वक अगर कोई शिव चालीसा का पाठ करता है, तो निश्चित रूप से उसे मनवांछित फल की प्राप्ति होगी। अगर आप सम्पूर्ण शिव चलीसा का पाठ करने में असमर्थ हैं, तो इच्छित वर की प्राप्ति हेतु कम से कम इस पंक्ति “कठिन भक्ति देखि प्रभु शंकर, भये प्रसन्न दिए इच्छित वर” का 21 दिन तक प्रातःकाल 51 बार जप करें। आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी। इसमें कोई संदेह नहीं है।

शिव चालीसा के पाठ से असाध्य रोगों से मुक्ति

आप यदि किसी भी तरह की बीमारी से पीड़ित हैं, और काफी प्रयासों के बाद भी बीमारी आपका पीछा नहीं छोड़ रही है, तो जल्द से जल्द भगवान् भोलेनाथ की पूजा प्रारम्भ कर दें। माना जाता है कि, शिव चालीसा के पाठ से समस्त बीमारियां भी समाप्त हो जाती हैं। शिव चालीसा के पाठ से शिव स्थाशीघ्र प्रसन्न होते हैं। अतः प्रत्येक दिन प्रातः काल स्नान करके शिव चालीसा का पाठ करें। समस्त बीमारियां स्वतः दूर हो जाएँगी।

शिव चालीसा के पाठ से गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा

यदि कोई गर्भवती स्त्री भक्तिपूर्वक शिव चालीसा का पाठ करती है, तो स्वयं भोले शंकर उस गर्भ में पल रहे बच्चे की रक्षा करते हैं। एवं पूर्ण रूप से स्वस्थ व भाग्यशाली बच्चा जन्म लेता है।

धन-लक्ष्मी में वृद्धि

यदि आप अपने जीवन में आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, हमेशा पैसे की समस्याएं बनी रहती हैं, तो शिव चालीसा का पाठ अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। इस पंक्ति “धन निधन को देत सदा ही, जो कोई जाचे सो फल पाहि” का प्रातः काल 11 बार जप करें, घर में माता लक्ष्मी का आगमन प्रारम्भ हो जायेगा। एवं आर्थिक बाधाओं से मुक्ति मिलेगी।

शिव चालीसा में क्या-क्या शक्तियां हैं

देवों के देव महादेव को प्रसन्न करना अत्यंत सरल है। ऐसा माना जाता है, की सोमवार का व्रत रखने वाली लड़कियां भगवान् भोलेनाथ से मनचाहा वर प्राप्त कर सकती हैं।

अधिकतर लड़कियां अच्छा वर पाने के लिए सोमवार के दिन भगवान् शिव की अराधना एवं व्रत करती हैं। इससे उन्हें मनचाहा वर मिलता है। इसलिए सोमबार के दिन प्रातः काल एवं सायंकाल शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायक होता है।

शिव की कृपा की चाह रखने वालों को पूर्ण निष्ठा एवं भक्ति व् सच्चे ह्रदय से उनकी पूजा करनी चाहिए। शिव चालीसा का नियमित पाठ करने से न केवल लड़कियों को सुयोग्य वर मिलता है, बल्कि वैवाहिक समस्याओं एवं रिश्तों में आ रही रूकावट से भी मुक्ति मिलती है।

Shiv Chalisa PDF सारांश

प्रिय भक्तो शिव चालीसा का पाठ हमें सुख और दुःख में हमेश करते रहना चाहिए। शिव चालीसा सदैव फलदायी होता है। जब आप कभी अकेला महसून करे उस समय आप भोले शंकर को याद कर के शिव चालीसा का पाठ कर के देखिये आप को कितना आत्मशांति की प्राप्ति होती है।

मैं खुद शिव चालीसा का पाठ करता करता हूँ। मैंने इस पोस्ट के माध्यम से शिव की शक्तियों के बारे में आप को अवगत कराया है साथ ही शिव चालीस करने की विधि भी बताई है।

प्रिय भक्तो मैंने आप लोगो को Shiv Chalisa PDF फाइल भी उपलब्ध करा दी है। आप डाउनलोड लिंक पर क्लिक कर Shiv Chalisa PDF फाइल को अपने पास सुरक्षित रख सकते है।

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